अंतर निर्वात
Poem

अंतर निर्वात

यह शून्य है या खालीपन की छाया? जब तुम्हें एकांत ही प्रिय था, तो फिर इस निःसंगता से भय क्यों?

बचपन की छांव
Poem

बचपन की छांव

गर्मियों की छुट्टियाँ… हमारे आम के बागान की गहरी छाँव में बिछी चटाइयाँ, उनके नीचे आड़े-तिरछे पड़े हम सब नटखट—बच्चों

Poem

Silly Me!!!

Silly me… Trying to catch emotions and turn them into action — Ha! Finish a book within an hour, And

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